केंद्रीय कर्मचारियों की भांति शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाए योगी सरकार : धर्मेंद्र पांडेय।

शिक्षामित्र साधारण पृष्ठभूमि के गांव के गरीब किसान के बेटे हैं।

कुशीनगर जनपद के शिक्षामित्र संघ के सेवरही ब्लाक अध्यक्ष धर्मेंद्र पाण्डेय ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षामित्र के साथ प्रदेश सरकार द्वारा सौतेलापन व्यवहार किया जा रहा है ,अन्य प्रदेशों में शिक्षामित्र साथियों को उत्तर प्रदेश से अधिक वेतन मिलता है और अध्यापक के बराबर सारा काम करने के बाद भी उत्तर प्रदेश में मात्र दस हजार रूपये ग्यारह महीने के लिए दिया जाता है। शिक्षामित्र अपनी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं उनको अपना जीवन यापन करना अत्यन्त दुष्कर हो रहा है लेकीन सरकार से आज तक कोइ राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा की न जाने कितनी शिक्षा मित्र साथी असमय मौत को गले लगा लिया लेकिन सरकार के तरफ से सांत्वना के दो शब्द नही निकले। योगी सरकार के प्रथम कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा जी के नेतृत्व में एक कमेटी बनी जिसमें शिक्षामित्र के मांग का निस्तारण किया जाना था लेकिन हवा हवाई बन कर रह गई योगी सरकार के द्वितीय कार्यकाल में भी हाईकोर्ट के निर्देश पर एक कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली बनाई गई जो आज तक शिक्षामित्र के समस्याओं का हल नहीं निकल सकी। यूपी मे सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को 1.37 लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन को निरस्त कर दिया था। उसके बाद शिक्षामित्रों ने 12 माह का मानदेय देने, सेवाकाल 62 वर्ष करने, मानदेय बढ़ाने, निशुल्क चिकित्सा सुविधा आदि मांगों को लेकर आंदोलन किया था। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने अगस्त 2017 में मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार कर दिया था। शिक्षामित्र साल में 11 महीने दस हजार रुपये मानदेय पर बच्चों का भविष्य संवारने में लगे हैं। अखिलेश उर्फ राजू द्विवेदी ने कहा की हमे न चपरासी का पद मिल रहा है और न ही संविदा का हम सबकी आर्थिक स्थिति सही नही है, भूख, भय और गरीबी से त्रस्त हैं, वर्षों से आज तक मानदेय नही बढ़ा और हमारी सामाजिक सम्मान की भी अपार क्षति हुई है। हम सभी चाहते हैं की सरकार इस गम्भीर समस्या का तत्काल समाधान करें। इस अवसर पर ब्लाक अध्यक्ष धर्मेन्द्र पांडेय, उपाध्याक्ष अनुज श्रीवास्तव, अजित राय, अरविंद राय, गोरख सिंह, अश्वनी शर्मा, राजू दुबे आदि मौजूद रहे।
Author: SPP BHARAT NEWS






