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Very heart touching Story…

*Very heart touching Story*
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*प्यार प्रेमिका से हो या पत्नी से*
*पर प्यार हो तो ऐसा ???? ही होना चाहिए.!!*
✍️Prakash Desai, Journalist


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????एक हृदयस्पर्शी घटना????

सूर्योदय हुआ ही था कि एक वृद्ध, डॉक्टर के दरवाजे पर आकर घंटी बजाने लगे। सुबह-सुबह कौन आ गया? कहते हुए डॉक्टर की पत्नी ने दरवाजा खोला।

वृद्ध को देखते ही डॉक्टर की पत्नी ने कहा..
दादा आज इतनी सुबह? क्या परेशानी हो गयी आपको?
वृद्ध बोले अंगूठे के टांके कटवाने आया हूं, डॉक्टर साहब के पास। क्षमा करें मुझे 8:30 बजे दूसरी जगह पहुंचना होता है, इसलिए जल्दी आया ।

डाक्टर के पड़ोस वाले मोहल्ले में ही ऊन वृद्ध का निवास था, जब भी जरूरत पड़ती वह डॉक्टर के पास आते थे ।इसलिए डाक्टर उनसे परिचित थे।
डाक्टर कमरे से बाहर आकर बोले,
कोई बात नहीं दादा बैठें।
दिखाएं आपका अंगूठा.?
डॉक्टर ने पूरे ध्यान से अंगूठे के टांके खोले, और कहा कि..
दादा बहुत बढ़िया है, आपका घाव भर गया है। फिर भी मैं पट्टी लगा देता हूं कि कहीं पर चोंट न पहुंचे।
डाक्टर तो बहुत होते हैं, परंतु यह डॉक्टर बहुत हमदर्दी रखने वाले और दयालु थे।
डॉक्टर ने पट्टी लगाकर कर पूछा :
दादा आपको कहां पहुंचना पड़ता है 8:30 बजे? आपको देर हो गई हो तो मैं आपको छोड़ने वहां आता हूं ।
वृद्ध ने कहा कि नहीं-नहीं डॉक्टर साहब, अभी तो मैं घर जाऊंगा, नाश्ता तैयार करूंगा, फिर निकलूंगा, और 9:00 बजे वहा पहुंच जाऊंगा।
उन्होंने डॉक्टर का आभार माना और जाने के लिए खड़े हुए।
*बिल लेकर के उपचार करने वाले तो बहुत डॉक्टर होते हैं, परंतु दिल से उपचार करने वाले कम ही होते हैं।*
दादा खड़े हुए तभी डॉक्टर की पत्नी ने आकर कहा कि दादा नाश्ता यहीं कर लें।
वृद्ध ने कहा कि नही बहन।
मैं तो यहां नाश्ता कर लेता, परंतु उसको नाश्ता कौन कराएगा.?
डॉक्टर ने पूछा किस को नाश्ता कराना है ?
तब वृद्ध ने कहा कि मेरी पत्नी को।
तो वह कहां रहती हैं ? और 9:00 बजे आपको कहां पहुंचना है ?
वृद्ध ने कहा : डॉक्टर साहब वह तो मेरे बिना रहती ही नहीं थी, परंतु अब वह अस्वस्थ है, तो नर्सिंग होम में है ।
डॉक्टर ने पूछा : क्यों? उनको क्या तकलीफ है?
वृद्ध व्यक्ति ने कहा : मेरी पत्नी को अल्जाइमर हो गया है, उसकी याददाश्त चली गई है ।
पिछले 5 वर्ष से वह मुजे पहचानती भी नहीं है।
मैं नर्सिंग होम में जाता हूं, उसको नाश्ता खिलाता हूं, तो वह फटी आंख से शून्य नेत्रों से मुझे देखती है। मैं उसके लिए अनजाना हो गया हूं।
ऐसा कहते कहते वृद्ध की आंखों में आंसू आ गए.!
डॉक्टर और उसकी पत्नी की आंखें भी गीली हो गई.!
याद रखें…
प्रेम निस्वार्थ होता है, प्रेम सब के पास होता है, परंतु एक पक्षिय प्रेम यह दुर्लभ है.. पर होता है जरूर.!!
कबीर ने लिखा है:-
*प्रेम ना बाड़ी उपजे, प्रेम न हाट बिकाय*
*प्रेम बाजार में नहीं मिलता है*
डॉक्टर और उनकी पत्नी ने कहा :
दादा, आप इतने वृध्ध होते हुए भी 5 वर्ष से आप रोज नर्सिंग होम में उनको नाश्ता करने जाते हैं ?
आप थकते नहीं हैं? ऊबते नहीं हैं ?
वृद्धने कहा कि मैं हररोज तीन बार जाता हूं.. डॉक्टर साहब..!! उसने जिंदगी में मेरी बहुत सेवा की और आज भी मैं उसके सहारे जिंदगी जी रहा हूं। उसको देखता हूं तो मेरा मन भर आता है। मैं उसके पास बैठता हूं तो मुझमें शक्ति आ जाती है। अगर वह न होती तो अभी तक मैं भी बिस्तर पकड़ लेता.. लेकिन उसको ठीक करना है.. उसकी संभाल करना है.. इसलिए मुझमें रोज ताकत आ जाती है। उसके कारण ही मुझ में इतनी स्फुर्ती है। सुबह उठता हूं तो तैयार होकर काम में लग जाता हूं। यह भाव रहता है कि उसको मिलने जाना है..! उसके साथ नाश्ता करना है..! उसको नाश्ता कराना है.!
उसके साथ नाश्ता करने का आनंद ही अलग है। मैं अपने हाथ से उसको नाश्ता खिलाता हूं।
डॉक्टर ने कहा: दादा एक बात पूछूं?
पूछें ना डॉक्टर साहब ।
डॉक्टर ने कहा : दादा , वह तो आपको पहचानती नहीं,
न तो आपके सामने बोलती है, न हंसती है, तो भी आप मिलने जाते हैं..?
तब उस वृद्ध ने जो शब्द कहे, वह शब्द दुनिया में सबसे अधिक हृदयस्पर्शी और मार्मिक हैं।
*वृद्ध बोले : डॉक्टर साहब, वह नहीं जानती कि मैं कौन हूं, पर मैं तो जानता हूं ना कि वह कौन है.??*
और इतना कहते कहते हैं वृद्ध की आंखों से पानी की धारा बहने लगी।
डॉक्टर और उनकी पत्नी की आंखें भी भर आई.!!
कहानी तो पूरी होगी परंतु..
*किसीके भी जीवनमें स्वार्थ अभिशाप है, और प्रेम आशीर्वाद है।*
*प्रेम कम और मतलबी होता है तभी तो रिश्तो पर से भरोसा टूटता है।*
*वह नहीं जानती कि मैं कौन हूं परंतु मैं तो जानता हूं!*
यह शब्द शायद इस स्वार्थी दुनिया में प्रेम का प्रवाह प्रवाहित कर दें।
*अपने वो नहीं, जो तस्वीर में साथ दिखें,*
*अपने तो वो है, जो तकलीफ में साथ दिखे!*
लेकिन ये तो कलियुग है…
रिश्तों की कहानी जरूरत और स्वार्थ तक ही सीमित है.!!
बाकी सब रिश्तों में बहोत प्यार होने की गलत फहमी में लोग जिंदगी जी लेते हैं, वो अलग बात है.!!
???? *सदैव प्रसन्न रहिये!*????
बाकी सब अपने अपने कर्मों के हिसाब से..
*जो प्राप्त है.. वो पर्याप्त है*
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SPP BHARAT NEWS
Author: SPP BHARAT NEWS

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