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लोकतंत्र एक विशाल वटवृक्ष की भांति है, जिसके चार सशक्त स्तंभ इसे मजबूती प्रदान करते हैं: न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और पत्रकारिता।

लोकतंत्र एक विशाल वटवृक्ष की भांति है, जिसके चार सशक्त स्तंभ इसे मजबूती प्रदान करते हैं: न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और पत्रकारिता।

लोकतंत्र एक विशाल वटवृक्ष की भांति है, जिसके चार सशक्त स्तंभ इसे मजबूती प्रदान करते हैं : न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और पत्रकारिता। यदि इनमें से कोई भी स्तंभ कमजोर होता है, तो लोकतंत्र की पूरी संरचना हिल जाती है। वर्तमान समय में सबसे अधिक दबाव और षड्यंत्रों का शिकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, पत्रकारिता, हो रहा है।

*न्यायपालिका की स्वतंत्रता*

न्यायपालिका लोकतंत्र का वह स्तंभ है, जहां “सत्यमेव जयते” की भावना को सर्वोपरि माना जाता है। लेकिन क्या आज न्यायपालिका अपने मूल सिद्धांतों पर कार्य कर रही है? न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक दबाव, लंबित मामलों की अधिकता, न्याय में देरी और कुछ भ्रष्टाचार के मामले इसके पारदर्शी स्वरूप पर धब्बा लगा रहे हैं।

*कार्यपालिका और विधायिका की जिम्मेदारी*

लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका और विधायिका जनता के हितों की रक्षा के लिए होती हैं। लेकिन क्या ये दोनों अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से कर रही हैं? वर्तमान समय में कार्यपालिका में भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और राजनीतिक दबाव बढ़ रहे हैं। विधायिका में कई बार जनहित से अधिक व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थ हावी रहते हैं।

*पत्रकारिता पर संकट*

पत्रकारिता लोकतंत्र का आईना होती है। लेकिन आज पत्रकारों पर तरह-तरह के दबाव, प्रबंधन और सेंसरशिप थोपी जा रही हैं। निष्पक्ष पत्रकारों को धमकियां दी जाती हैं, फर्जी मुकदमे लादे जाते हैं, और कई बार उन्हें जान से भी मार दिया जाता है।

*समाधान*

लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी, कार्यपालिका में पारदर्शिता लानी, विधायिका को जनहित के लिए काम करने के लिए प्रेरित करना और पत्रकारिता को पूर्ण स्वतंत्रता देना आवश्यक है। जब तक पत्रकारिता निर्भीक और स्वतंत्र रहेगी, तब तक अन्य स्तंभों पर जनता की निगरानी बनी रहेगी और लोकतंत्र मजबूत रहेगा।

SPP BHARAT NEWS
Author: SPP BHARAT NEWS

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