विश्व आदिवासी दिवस 2025: आदिवासी जीवन दर्शन और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश
विश्व आदिवासी दिवस: प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली और मानवता का अनमोल दर्शन
प्रतिवर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World’s Indigenous Peoples) वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर आदिवासी दर्शन, धर्म, परम्परा, रीति-रिवाज और उनकी मौजूदा चुनौतियों पर विमर्श किया जाता है।
आदिवासी समाज सह-अस्तित्व, समानता, सामूहिकता, सहजीविता, सहभागिता और सामंजस्य पर विश्वास करता है। उनके जीवन का मूलमंत्र है – जल, जंगल, जमीन, भाषा और संस्कृति की रक्षा, क्योंकि यही उनकी अस्मिता का आधार है।
आदिवासी जीवन और प्रकृति
अंधाधुंध विकास ने न केवल आदिवासियों बल्कि पूरे मानव समुदाय को संकट में डाल दिया है। चिरस्थायी विकास और पर्यावरण संरक्षण का रहस्य आदिवासी दर्शन में छुपा है, जो प्रकृति को माता और साथी मानता है।
आदिवासी मानते हैं कि Global Warming और पर्यावरणीय संकट से बचने के लिए हमें उनकी जीवनशैली और संस्कृति अपनानी होगी।
अर्जुन मुंडा का विचार
पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन मुंडा के शब्दों में –
> “आदिवासियों का जीवन ही उनका दर्शन है। यह जीवन पद्धति प्रकृति के अनुरूप है, जहाँ प्रकृति को सहचर मानने की परम्परा है, अनुचर नहीं। उनके चरित्र में गहरी समानता, सादगी और विश्वसनीयता दिखाई देती है। आदिवासी जीवन बनावटी नहीं, बल्कि पूर्णतः प्राकृतिक है। वे पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, नदी-झरनों से संवाद करते हैं और अंदर से अधिक जागरूक होते हैं।”
विशेषता: लालच से परे समाज
आदिवासी भाषाओं में लाभ, मुनाफा, लालच, शोषण, दोहन जैसे शब्द ही नहीं हैं। वे न तो मुनाफा कमाने की सोचते हैं, न शोषण करते हैं, और न ही प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करते हैं।
बल्कि वे संसाधनों का उपयोग सिर्फ अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करते हैं, जिससे प्रकृति और जीवन के बीच संतुलन बना रहता है।
प्रेरणा और संदेश
आदिवासी जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेकर ही हम धरती और मानवता की रक्षा कर सकते हैं।
इस विश्व आदिवासी दिवस पर हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि आदिवासी समाज के ज्ञान, संस्कृति और जीवनशैली से सीखकर प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जिएँ।
सभी आदिवासी भाई-बहनों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
✍️ नवीन चन्द्र प्रसाद, वरिष्ठ पत्रकार एवं कोआर्डिनेटर – झारखंड, SPP BHARAT NEWS
Author: SPP BHARAT NEWS






