वसंत पंचमी : ज्ञान, सृजन और सात्विकता का पर्व
वसंत ऋतु में जब प्रकृति अपने सौंदर्य, उल्लास और नवीन ऊर्जा से मन को आह्लादित करती है, उसी समय ज्ञान, कला और विवेक की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती का पावन आगमन मानव जीवन में सृजनात्मकता, सात्विकता और मधुरता का संचार करता है। वसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मानसिक शुद्धि, बौद्धिक जागरण और आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक है।
माँ सरस्वती को मानसिक प्रदूषण से रक्षा करने वाली देवी कहा गया है। उनके आगमन के साथ ही संपूर्ण प्रकृति उल्लासित हो उठती है और मानव मन में ज्ञान, विवेक तथा सद्बुद्धि का संचार होता है। उनकी कृपा से मनुष्य में चिंतन, लेखन, भाषण, गायन, वादन, नृत्य और अभिनय जैसी सर्जनात्मक शक्तियाँ विकसित होती हैं।
विभिन्न धर्मों में माँ सरस्वती का स्वरूप
भारतीय संस्कृति की विशेषता यह है कि यहाँ ज्ञान की उपासना सभी धर्मों में किसी न किसी रूप में की जाती है।
- वैदिक धर्म में उन्हें सरस्वती कहा गया है।
- जैन धर्म में वे श्रुतदेवता के रूप में पूजित हैं।
- बौद्ध धर्म में उन्हें प्रज्ञा देवी के नाम से जाना जाता है।
प्रज्ञा अर्थात् ज्ञान — और ज्ञान ही मानव की सबसे बड़ी विशेषता है। यही कारण है कि माँ सरस्वती ऐसी देवी हैं, जिनकी आराधना किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सभी मत–मजहब के लोग श्रद्धा से करते हैं।
शारदा शक्तिपीठ और संगीत साधना
मध्यप्रदेश के सतना जिले के समीप मैहर में स्थित भारत–प्रसिद्ध शारदा शक्तिपीठ माँ सरस्वती की आराधना का एक अनुपम केंद्र है। यहीं सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वर्गीय उस्ताद अलाउद्दीन ख़ान ने वर्षों तक अनवरत संगीत साधना की। शतायु प्राप्त करने के पश्चात वे उसी शारदा प्रतिमा में लीन हो गए — यह घटना माँ सरस्वती की कृपा और संगीत साधना की पराकाष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।
स्तुति
शारदा शारदांभोज वदना वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदा अस्माकं, सन्निधिं सन्निधिं क्रियात॥
संदेश
आइए, वसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर हम सभी हृदय से माँ सरस्वती की आराधना करें, अपने मन को आह्लादित करें और जीवन में सद्बुद्धि, ज्ञान और सृजनात्मकता का संचार करें।
— नवीन चन्द्र प्रसाद
Author: SPP BHARAT NEWS


