मंत्री जी यहां भी कई डॉक्टर्स सरकार को दे रहे धोखा

कुशीनगर : सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर्स अब प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। डिप्टी सीएम ने फरमान जारी करते हुए प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं। सरकारी डॉक्टर्स के एनपीए लेने के बाद भी लगातार प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त रहने की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ने यह निर्देश दिया है। अब चोरी छिपे प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स पर शिकंजा कसेगा। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जनपद में और भी इलाकों में सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं। कुशीनगर में कसया, पडरौना, हाटा तमकुही, कप्तानगंज में सरकारी डॉक्टर बाकायदा निजी क्लिीनिक खोल कर बैठे मिल जाएंगे। वहीं छावनी पडरौना के कई चर्चित अस्पताल हैं, जहां सरकारी डॉक्टर्स आते हैं और अपनी सेवा के बदले मोटी रकम की कमाई करते हैं। सिटी में ही कुछ सरकारी डॉक्टर शाम के बाद अपने आवास पर ही मरीजों का इलाज करते हैं।
जानकारों की मानें तो सबसे कम सरकारी जूनियर डॉक्टर की महीने की सैलरी सातवें वेतन आयोग के बाद साठ हजार के आसपास से शुरू होती है। बढ़ते ग्रेड के आधार पर सैलरी में भी इजाफा होता रहता है। जबकि निजी प्रैक्टिस में अगर रोज कम से कम पांच मरीज को ओपीडी में भी देखते हैं तो उनकी कमाई महीने की डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच हो जाती है। इस मोह में ही सरकारी डॉक्टर सरकारी अस्पतालों से भी मरीजों को अपने निजी अस्पताल में आने की सलाह देते हैं।
सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं। इन्हें हर माह हजारों रुपए नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस (एनपीए) मिलता है। इसके बावजूद डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस कर अपनी दुकान चला रहे हैं। डॉक्टर्स की मनमानी की भनक लगने पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। सरकारी डॉक्टर्स से शपथ पत्र लिया जाता है कि वे प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेंगे। यदि प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए कोई भी सरकारी डॉक्टर पकड़ा जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई तय है, ऐसा कहना है डिप्टी सीएम का।
जनपद के अस्पतालों में तैनात सभी डॉक्टर्स का शपथ पत्र शासन को भेज दिया गया है। इसके बाद भी यदि कोई प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। : अल्पना रानी, सीएमओ, कुशीनगर
Author: SPP BHARAT NEWS






