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धर्म और पंथ : एक गहन विश्लेषण

धर्म और पंथ : एक गहन विश्लेषण

भारतीय भाषाओं में सबसे जटिल और गूढ़ शब्द है – ‘धर्म’। अंग्रेज़ी भाषा में इसका कोई सटीक पर्यायवाची नहीं है। यही कारण है कि पश्चिमी विद्वान अक्सर धर्म को मात्र पंथ या Religion मान लेते हैं। जबकि वस्तुतः धर्म का स्वरूप इससे कहीं अधिक व्यापक और बहुआयामी है।

धर्म क्या है?

धर्म का संबंध केवल आध्यात्मिक जगत से नहीं, बल्कि भौतिक सृष्टि से भी है।

तरलता जल का धर्म है।

गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का धर्म है।

प्रकाश एवं ऊष्मा अग्नि का धर्म है।

इस प्रकार धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि किसी वस्तु या प्राणी की स्वाभाविक गुणधर्मिता और जिम्मेदारी है।

पितृधर्म, पुत्रधर्म, मातृधर्म में जिम्मेदारी का भाव है।

राजधर्म, समाजधर्म में अनुशासन और कर्तव्य का भाव है।

विद्वान M.R. Joyce ने अपनी पुस्तक “Legal and Constitutional History of India” में लिखा है –

> “संस्कृत का ‘धर्म’ शब्द सबसे व्यापक है। अन्य भाषाओं में इसका पूर्ण विकल्प नहीं है। धर्म न्याय, नैतिकता, आध्यात्मिकता, मर्यादा, सेवाभाव, गुण, विशिष्टता, कर्तव्य, विधि और वैध शासन तक का द्योतक है।”

अर्थात्, धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि सदाचरण और जीवन की व्यापकता है।

पंथ क्या है?

पंथ (Religion) की व्युत्पत्ति लैटिन भाषा से है –

Re यानी वापस या पुनः

Ligo यानी जोड़ना, बांधना

अर्थात् पंथ का भाव है – मानव को परम तत्व से जोड़ना।

जब कोई महापुरुष अपनी साधना और अनुभव के आधार पर मार्ग दिखाता है, तो उसके शिष्य और अनुयायी उस पथ पर चलकर एक पंथ या सम्प्रदाय की स्थापना करते हैं।

उनके उपदेश ग्रंथ बनते हैं।

उनकी बताई विधि पूजा-पद्धति बनती है।

उनके अनुयायी एक विशेष धर्मावलंबी कहलाते हैं।

उदाहरणस्वरूप – इस्लाम और ईसाई धर्म विशिष्ट महापुरुषों द्वारा प्रवर्तित पंथ हैं।

हिन्दू धर्म – पंथ से परे

विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि हिन्दू धर्म पंथ की श्रेणी में नहीं आता।

इसका कोई प्रवर्तक नहीं है।

इसकी कोई एक ही पुस्तक नहीं है।

कोई एक आराध्य देव भी नहीं है।

यहाँ तक कि ईश्वर को मानना या न मानना भी हिन्दू पहचान का आधार नहीं है।

इसलिए हिन्दू धर्म को किसी पंथ का नाम देना अनुचित है। वास्तव में, यह अनेक पंथों और परंपराओं का एक समुच्चय है, जो जीवन के हर पहलू को धर्म के व्यापक स्वरूप में समेटता है।

✍️ संकलन : नवीन चंद्र प्रसाद
???? स्रोत : विश्वनाथ लिमये की पुस्तक ‘मैं’ या ‘हम’ तथा अन्य समाचार-पत्रों के आलेख

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Author: SPP BHARAT NEWS

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