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क्रिसमस :“प्रेम, सेवा और मानवता का उत्सव”

क्रिसमस :“प्रेम, सेवा और मानवता का उत्सव”


क्रिसमस केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के मूल मूल्यों का उत्सव है। यह वह दिन है जब इतिहास ने एक ऐसे व्यक्तित्व को जन्म लेते देखा, जिसने प्रेम, करुणा और समभाव के माध्यम से पूरी दुनिया को नई दृष्टि दी। मान्यता है कि 25 दिसम्बर को ईसा मसीह का अवतरण हुआ—गरीबों, वंचितों और पीड़ितों के मसीहा के रूप में।
ईसा मसीह का जन्म किसी राजमहल में नहीं, बल्कि एक साधारण गौशाला में हुआ। यह घटना स्वयं में एक गहरा संदेश समेटे हुए है—कि ईश्वर सत्ता, वैभव या ताकत में नहीं, बल्कि विनम्रता, सादगी और सेवा में प्रकट होता है। ईसा ने अपने जीवन के माध्यम से बेघरों, लाचारों, कमजोरों और हाशिए पर खड़े लोगों को न केवल सहारा दिया, बल्कि उन्हें सम्मान और आत्मगौरव भी प्रदान किया।
उनकी शिक्षाओं ने समाज में गहराई से जमी उन दीवारों को तोड़ने का प्रयास किया, जो इंसान और इंसान के बीच खड़ी थीं—अमीर और गरीब, शक्तिशाली और कमजोर, बड़े और छोटे के भेद को उन्होंने अस्वीकार किया। ईसा मसीह ने अपने आध्यात्मिक अनुभव के बल पर स्वयं को ईश्वर का पुत्र कहा, लेकिन उससे भी बड़ा सत्य यह बताया कि हर मनुष्य ईश्वर का पुत्र और पुत्री है। यही वह विचार है, जो पूरी मानवता को एक ही परिवार में बांधता है।
यह विचार भारतीय दर्शन के उस सूत्र से मेल खाता है, जिसे हम “वसुधैव कुटुम्बकम्” कहते हैं—अर्थात पूरी धरती एक परिवार है। समभाव ही ईश्वर की पूर्णता है और समभाव की साधना ही मनुष्य को आध्यात्मिक ऊंचाई तक ले जाती है।
ईसा मसीह ने जीवन के लिए प्रेम को सर्वोच्च मूल्य माना। उन्होंने मानवता को दो सरल लेकिन कालजयी सूत्र दिए—पहला, “जैसा व्यवहार तुम दूसरों से अपने लिए चाहते हो, वैसा ही व्यवहार दूसरों के साथ करो।” और दूसरा, “तुमने मनुष्य के लिए जो कुछ किया, वही तुमने ईश्वर के लिए किया।” ये सूत्र केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदना की बुनियाद हैं।
सेवा और क्षमा के क्षेत्र में ईसा मसीह की मिसाल अद्वितीय है। शिष्यों के पैर धोना हो या सलीब पर चढ़ते समय अपने अपराधियों को क्षमा कर देना—ये घटनाएं बताती हैं कि सच्ची महानता सत्ता में नहीं, बल्कि सेवा और क्षमा में निहित है। यही वह बिंदु है जहां मानवता और प्रभुता एक-दूसरे से मिलती हैं।
आज जब दुनिया हिंसा, असहिष्णुता, भेदभाव और स्वार्थ से जूझ रही है, तब ईसा मसीह का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाता है। प्रेम, सेवा, क्षमा, समानता, समभाव और पारिवारिक भावना—इन मूल्यों के बिना कोई भी समाज स्थायी शांति और विकास की कल्पना नहीं कर सकता।
क्रिसमस हमें यही याद दिलाता है कि अगर मानवता को बचाना है, तो हमें ईसा मसीह की शिक्षाओं को केवल स्मरण नहीं, बल्कि जीवन में उतारना होगा। यही इस पर्व का सच्चा अर्थ और सार है।
खुश जन्म पर्व।
Merry Christmas to all.
— नवीन चन्द्र प्रसाद

SPP BHARAT NEWS
Author: SPP BHARAT NEWS

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