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लखनऊ में कथक की लय पर गूँजी “आजाद रूह”: Amrita Pritam को नृत्यांजलि

लखनऊ में कथक की लय पर गूँजी “आजाद रूह”: Amrita Pritam को नृत्यांजलि

लखनऊ | 28 फरवरी
साहित्य और शास्त्रीय नृत्य की संवेदनाओं का अद्भुत संगम उस समय साकार हुआ, जब कल्चरल क्वैस्ट संस्था की ओर से कथक गुरु सुरभि सिंह ने पंजाबी साहित्य की महान हस्ती Amrita Pritam के जीवन को “आजाद रूह” शीर्षक नृत्य-नाटिका के माध्यम से मंच पर जीवंत किया। गोमतीनगर स्थित Sant Gadge Ji Maharaj Auditorium में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को कविता, इतिहास और स्त्री-अंत:स्वर की एक गहन यात्रा पर आमंत्रित किया।

कथक में साकार हुआ संघर्ष, प्रेम और स्त्री-स्वर
लेखन, संगीत, वॉइस-ओवर और निर्देशन की बागडोर संभालते हुए स्वयं अमृता प्रीतम की भूमिका में सुरभि सिंह ने अपने शिष्यों के साथ मंच पर प्रभावशाली दृश्य-भाषा रची।
नृत्य-नाटिका में अमृता के बाल्यकालीन संघर्ष, भारत–पाक विभाजन की त्रासदी और स्त्री-चेतना की गहराइयों को कथक की लयात्मकता में पिरोया गया।
“उठने वारिस शाह”, “मजबूर” और “तवारीख” जैसी कालजयी रचनाओं को तबले की थाप और घुंघरुओं की झंकार के साथ प्रस्तुत किया गया। विभाजन का दर्द, प्रेम की जटिलता और स्त्री-स्वर की निर्भीकता—इन सभी भावों को सशक्त अभिव्यक्ति मिली, जिसे दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।
विशेष आकर्षण रहा अमृता के जीवन के दो महत्वपूर्ण अध्यायों का मंचन—
प्रख्यात शायर Sahir Ludhianvi के प्रति अनकहा अनुराग
चित्रकार Imroz के साथ आत्मीय संबंध
प्रेम की सूक्ष्म परतों को कथक की मुद्राओं और भावाभिनय में रूपांतरित कर सुरभि सिंह ने अमृता की ‘आज़ाद रूह’ को साकार कर दिया।

पुस्तक लोकार्पण और सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार संजय मेहरोत्रा हमनवा की पुस्तक “रांझा मेरा”—जो अमृता प्रीतम के जीवन पर आधारित है—का लोकार्पण भी किया गया।
इस अवसर पर पद्मश्री Vidya Bindu Singh, पद्मश्री Krishna Kanhai और डॉ. पूर्णिमा पांडे सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
साथ ही साहित्य की 11 विभूतियों को “अमृता प्रीतम सम्मान” से सम्मानित किया गया, जिनमें प्रमुख नाम शामिल रहे—
पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह
प्रो. रवि भट्ट
डॉ. अमिता दुबे
हिमांशु वाजपेई
आतिफ हनीफ
संजय मल्होत्रा हमनवा
पायल सोनी
सत्या सिंह
डॉ. करुणा पांडे
डॉ. श्वेता श्रीवास्तव
सुजाता राज्ञी

संगीत, साज-सज्जा और सामूहिक ऊर्जा
पं. धर्मनाथ मिश्र के गायन ने प्रस्तुति को आत्मीयता प्रदान की, जबकि पं. रविनाथ मिश्र की तबला-संगति और दीपेन्द्र कुँवर की बांसुरी ने भाव-गहराई को और सशक्त किया।
मंच पर सुरभि सिंह के साथ 25 शिष्य-शिष्याओं—ईशा रतन, मीशा रतन, अंकिता मिश्रा, अंकिता सिंह, आकांक्षा पांडेय, अंजुल, पियूष, अनुभव, सृष्टि, महेश चन्द्र देवा, विकास दुबे, अखिलेश, आरती, सुन्दर, इशिका, मानसी, संगीता, सीमा सहित अन्य कलाकारों—ने सामूहिक ऊर्जा से प्रस्तुति को जीवंत बनाया।
शकील द्वारा निर्मित सेट और गोविन्द की प्रकाश-सज्जा ने तत्कालीन परिवेश को प्रभावी ढंग से उकेरा। मनोज और शहीर की मुख-सज्जा तथा सहारा बानो और उज्ज्वल की व्यवस्थाओं ने मंचन को सौंदर्यपूर्ण पूर्णता प्रदान की।

साहित्य और नृत्य का सशक्त संवाद
संस्था के अध्यक्ष जे.बी. सिंह, उपाध्यक्ष केशव नाथ त्रिपाठी और कोषाध्यक्ष रामउग्रह शुक्ल सहित उपस्थित कला-प्रेमियों ने इस प्रयोगधर्मी प्रस्तुति की मुक्त कंठ से सराहना की।
“आजाद रूह” केवल एक नृत्य-नाटिका नहीं, बल्कि साहित्य और शास्त्रीय नृत्य के जीवंत संवाद का प्रभावशाली उदाहरण सिद्ध हुई—जहाँ Amrita Pritam की कविता ने घुंघरुओं की झंकार में नई जीवंतता पाई और लखनऊ की सांस्कृतिक धड़कनों में देर तक गूँजती रही।

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Author: SPP BHARAT NEWS

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