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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : नारी शक्ति को नमन

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : नारी शक्ति को नमन

हर वर्ष 8 मार्च को दुनिया भर में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्रेम व्यक्त करने का अवसर है। साथ ही यह दिन महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है।
नारी को सृष्टि की शक्ति कहा गया है। वास्तव में हर पथ को रोशन करने वाली शक्ति एक नारी ही होती है। परंपरागत पितृसत्तात्मक समाज में लंबे समय तक महिलाओं के लिए कार्यक्षेत्र सीमित कर दिए गए थे। समाज यह तय करता था कि महिलाओं को किस प्रकार के कार्य करने चाहिए और किन क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए।
लेकिन समय के साथ यह स्थिति बदल रही है। महिलाओं ने पुरानी धारणाओं और सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ते हुए हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। आज वे प्रशासनिक पदों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं, व्यापार और उद्योग में सफलता प्राप्त कर रही हैं तथा शिक्षा, विज्ञान, कला, साहित्य और राजनीति जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

इतिहास में नारी शक्ति के प्रेरक उदाहरण
भारतीय इतिहास और समाज में अनेक महान महिलाओं ने अपने कार्यों से दुनिया को प्रेरित किया है।
इनमें देवी अहिल्याबाई होलकर, मदर टेरेसा, इला भट्ट, महादेवी वर्मा, राजकुमारी अमृत कौर, सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी और कस्तूरबा गांधी जैसी महान हस्तियों के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
इसी प्रकार श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने दृढ़ संकल्प और नेतृत्व क्षमता से भारतीय और वैश्विक राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। उन्हें “लौह महिला” की उपाधि यूँ ही नहीं मिली थी।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम
इस वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की मुख्य थीम है —
“Give To Gain” (दान से लाभ)।
यह थीम सहयोग, उदारता और महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए संसाधनों, अवसरों और सहयोग को साझा करना है, जिससे संपूर्ण मानवता को लाभ हो सके।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार इस वर्ष एक और महत्वपूर्ण संदेश पर भी जोर दिया गया है —
“Rights. Justice. Action. For All Women and Girls”
(सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार, न्याय और कार्रवाई)।
इसका मुख्य उद्देश्य है—
महिलाओं को सामाजिक और राजनीतिक निर्णयों में समान भागीदारी देना
लैंगिक समानता को बढ़ावा देना
महिलाओं के खिलाफ हर प्रकार की हिंसा का अंत करना
महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना
यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना है जहाँ महिलाओं को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार मिले, उनके कार्य के लिए समान और उचित पारिश्रमिक मिले, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त हों और उनके विरुद्ध होने वाली हर प्रकार की हिंसा समाप्त हो।
हालाँकि परिवर्तन की बयार चल पड़ी है, लेकिन इस लक्ष्य को पूरी तरह प्राप्त करने के लिए समाज की सकारात्मक भागीदारी अभी भी आवश्यक है।

नारी सम्मान : समाज की जिम्मेदारी
आज भी समाज के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत बनाया जाए। भ्रूण हत्या, भेदभाव और महिलाओं के प्रति असम्मान जैसी समस्याएँ अभी भी समाज के कुछ हिस्सों में मौजूद हैं।
यह नहीं भूलना चाहिए कि नारी ही जीवन का आधार है। उसी के माध्यम से मानव का जन्म और अस्तित्व संभव होता है। इसलिए नारी का अपमान करना या उसे कमतर समझना मानवता के मूल्यों के विरुद्ध है।
भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी, दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में पूजनीय माना गया है। यह परंपरा केवल आस्था तक सीमित न रहकर व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर समस्त मातृशक्ति को हार्दिक शुभकामनाएँ।
— नवीन चन्द्र प्रसाद

SPP BHARAT NEWS
Author: SPP BHARAT NEWS

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