📰 राष्ट्रीय पत्रकार परिषद एवं सुरक्षा संघ का ऐलान: “लोकतंत्र में निर्भीक पत्रकारिता की रक्षा के लिए कानूनी सुरक्षा अनिवार्य”
पत्रकार सुरक्षा कानून, फर्जी मुकदमों पर रोक और मानदेय सुनिश्चित करने की मांग तेज | देशव्यापी अभियान की घोषणा
📌 मुख्य बिंदु (Highlights):
- तीन प्रमुख मांगें: देशव्यापी पत्रकार सुरक्षा कानून, फर्जी मुकदमों पर रोक और निश्चित मानदेय/सामाजिक सुरक्षा।
- अहिंसक आंदोलन: संगठन बोला— “सड़क पर भीड़ नहीं, हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी कलम है।”
- लोकतांत्रिक अधिकार: पत्रकारों की सुरक्षा केवल मीडिया का नहीं, बल्कि नागरिकों के सूचना के अधिकार का राष्ट्रीय प्रश्न है।
नई दिल्ली। देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र कार्य-परिस्थितियों और सम्मानजनक पेशेवर अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ तेज हो गई है। राष्ट्रीय पत्रकार परिषद एवं सुरक्षा संघ ने पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ी तीन प्रमुख मांगों को लेकर एक व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा की है।
संगठन के केंद्रीय नेतृत्व ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता संविधान द्वारा संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आधार है। यदि समाचार संकलन करने वाले पत्रकार ही असुरक्षित महसूस करेंगे, तो इसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता और नागरिकों के सूचना के अधिकार पर पड़ेगा।
🎯 संगठन की ३ प्रमुख राष्ट्रीय मांगें
1. देशव्यापी ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ लागू हो
समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों पर बढ़ते हमले, उत्पीड़न और दबाव को देखते हुए एक व्यापक विधिक ढांचा (Legal Framework) बनाया जाए, जो पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनके पेशेवर दायित्वों में आने वाली बाधाओं को दूर करे।
2. उत्पीड़न व फर्जी मुकदमों पर लगे कठोर रोक
समाचार कवरेज के दौरान पत्रकारों को धमकी देने, कार्य में बाधा डालने या कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने के मामलों में त्वरित व कठोर दंडात्मक कार्रवाई के लिए स्पष्ट कानून बने।
(नोट: यह संगठन की प्रमुख मांग है, वर्तमान कानून में ऐसा सार्वभौमिक प्रावधान स्वतः लागू नहीं है।)
3. मानदेय व आर्थिक सुरक्षा की नीति बने
विशेषकर छोटे और मध्यम समाचार संस्थानों के पत्रकार असंगठित परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। उनके पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा और पेशेवर अधिकारों को लेकर स्पष्ट राष्ट्रीय नीति बनाई जाए, ताकि पत्रकारिता आर्थिक असुरक्षा का शिकार न हो।
🖊️ “भीड़ नहीं, कलम हमारी ताकत” — संगठन का लोकतांत्रिक संकल्प
संगठन के केंद्रीय प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या भीड़-आधारित प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है। संगठन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपनी मांगें सरकार के सामने रखेगा।
“हम सड़क पर भीड़ जुटाने की राजनीति नहीं करेंगे। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी कलम है। हम संविधान और कानून के दायरे में रहकर पत्रकारों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।”
— केंद्रीय प्रमुख, राष्ट्रीय पत्रकार परिषद एवं सुरक्षा संघ
⚖️ लोकतंत्र की मजबूती का राष्ट्रीय प्रश्न
विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्वतंत्र पत्रकारिता शासन की जवाबदेही तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पत्रकारों की सुरक्षा केवल मीडिया जगत का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की संस्थागत विश्वसनीयता और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा से जुड़ा विषय है।
📋 मुख्य मांगों का सारांश:
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🛡️ देशभर में प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो।
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🚫 धमकाने, बाधा पहुंचाने व फर्जी मुकदमों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई का प्रावधान बने।
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💰 मानदेय और सामाजिक सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय नीति गठित हो।
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📜 अनुच्छेद 19(1)(a) की भावना के अनुरूप पत्रकारिता को संस्थागत संरक्षण मिले।
✍️ रिपोर्ट: प्रदिप शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार
📰 स्रोत: SPP Bharat News
Author: SPP BHARAT NEWS
