छावा से जो राष्ट्र-चिति समृद्ध हुई है तो कई हलकों में चिन्ता है। इसलिए पुनः वही घिसा पिटा फूट डालने का फ़ार्मूला चल रहा है। अब राजपूतों और मराठों को एक दूसरे के सामने किया जा रहा है।